प्राकृतिक गैस एवं नवीकरणीय ऊर्जा

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हमारा विश्वास है कि विकास केवल एक पोषक और सक्षमकारी पर्यावरण में ही हो सकता है। हम सकारात्मक पर्यावरणीय परिणामों को बढ़ावा देने के लिए संधारणीय तरीकों और साधनों पर कार्य करते हैं।

प्राकृतिक गैस

सिटी गैस वितरण (सीजीडी)वर्तमान में, एचपीसीएल संयुक्त उद्यम कंपनियों अवंतिका गैस लिमिटेड (एजीएल), भाग्यनगर गैस लिमिटेड (बीजीएल) और गोदावरी गैस प्राइवेट लिमिटेड (जीजीपीएल) के माध्यम से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के 8 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) में सिटी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क का संचालन कर रही है। एचपीसीएल अहमदाबाद में स्टैंडअलोन आधार पर एक सीएनजी नेटवर्क भी संचालित कर रही है। सीजीडी व्यवसाय को और विस्तार देने के लिए, एचपीसीएल संयुक्त उद्यम कंपनी एचपीओआईएल गैस प्राइवेट लिमिटेड (एचओजीपीएल) के माध्यम से अम्बाला-कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के भौगोलिक क्षेत्रों और कोल्हापुर (महाराष्ट्र) जिले तथा सोनीपत के के भौगोलिक क्षेत्रों (पहले से अधिकृत क्षेत्रों को छोड़कर) और हरियाणा में जिंद जिले में स्टैंडअलोन आधार पर सीजीडी नेटवर्क स्थापित कर रही है।

प्राकृतिक गैस की सोर्सिंग और विपणन की सुविधा के लिए, एचपीसीएल अपनी संयुक्त उद्यम कंपनी, एचपीसीएल शापूरजी एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एचएसईपीएल) के माध्यम से गुजरात (गिर सोमनाथ जिला) में छारा बंदरगाह पर 5 एमएमटीपीए एलएनजी रिगैसीफिकेशन टर्मिनल का निर्माण कर रही है।

इसके अलावा, एचपीसीएल अपनी संयुक्त उद्यम कंपनियों जीएसपीएल इंडिया गैसनेट लिमिटेड(जीआईजीएल) तथा जीएसपीएल इंडिया ट्रांसको लिमिटेड (जीआईटीएल) के माध्यम से तीन क्रॉस-कंट्री प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (मेहसाना से बठिंडा, बठिंडा से श्रीनगर और मल्लावरम से भीलवाड़ा) का निर्माण भी कर रही है।

2019-20 की प्रमुख गतिविधियां :

  1. जींद - सोनीपत भौगोलिक क्षेत्र में सीएनजी बिक्री की शुरुआत की गई तथा 155 इंच-किमी पाइपलाइन बिछाई गई। नेटवर्क का और अधिक विस्तार प्रगति पर है।
  2. एचपीसीएल की संयुक्त उद्यम कंपनी, जीआईटीएल द्वारा कुंचनापल्ली (आप्र) से रामागुंडम फर्टिलाइजर प्लांट तक 365 किमी क्रॉस कंट्री प्राकृतिक गैस पाइपलाइन कमीशन की गई।
  3. ऑटोमोबाइल सेक्टर में सीएनजी तथा घरेलू पीएनजी की आपूर्ति के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से सीजीडी बोली के दौरान 10वें राउंड में 20 जिलों के 9 भौगोलिक क्षेत्रों में तथा 9वें राउंड में 1 भौगोलिक में गैस आवंटन प्राप्त किया।
  4. जींद-सोनीपत भौगोलिक क्षेत्र तथा उत्तर प्रदेश क्लस्टर के तहत अन्य 5 भौगोलिक क्षेत्रों में गैस निकासी के लिए गैस बिक्री संचरण समझौता तथा गैस सुविधा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  5. कोल्हापुर, अंबाला-कुरुक्षेत्र, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, हैदराबाद, विजयवाड़ा, काकीनाड़ा, उज्जैन तथा ग्वालियर में एचपीसीएल की 4 संयुक्त उद्यम कंपनियों (एचओजीपीएल, जीजीपीएल, बीजीएल, एजीएल) द्वारा 51 सीएनजी स्टेशनों को शुरू किया गया तथा 1,52,301 घरेलू पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं।

संपीडित बायोगैस

भारत सरकार ने 16 मई, 2018 से प्रभावी जैव ईंधन-2018 की राष्‍ट्रीय नीति विस्‍तार किया है। यह नीति आगामी दशक में ऊर्जा एवं परिवहन के क्षेत्रों में जैव ईंधन के उपयोग में वृद्धि लाए जाने के लिए लक्षित है।

इस नीति से निम्‍नलिखित लाभ प्राप्‍त किए जाने लक्ष्‍यबद्ध हैं।

  • कच्‍चे तेल एवं एलएनजी के आयात में कमी लाना जिससे विदेशी मुद्रा की विशाल बचत संभव हो सकेगी।
  • घरेलू फीडस्टॉक के उपयोग, विकास को बढ़ावा देने और जैव ऊर्जा के उत्पादन के लिए इसका उपयोग करने जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा में योगदान के साथ साथ विकल्‍प के तौर पर जीवाश्म ईंधन का बढ़ सकेगा।
  • जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण अल्‍पीकरण एवं नियंत्रण
  • संवहनीय विधि से रोजगार के नए अवसरों का निर्माण करना
  • जैव ईंधन की उत्‍पति के लिए उन्‍नत प्रौद्योगिकियों की उपयोज्‍यता को प्रोत्‍साहित करना।

देश में उद्योग / एचपीसीएल द्वारा अनेक जैव परियोजनाएं प्रारंभ की गई जिनमें भारत सरकार के एसएटीएटी (वहनीय परिवहन के लिए संवहनीय विकल्‍प) प्रयास के अंतर्गत कम्‍प्रैस्‍ड जैव गैस (सीबीजी) परियोजनाओं सहित अनेक जैव ईंधन परियोजनाएं शामिल हैं जिसके लिए 2023-24 तक 5000 सीबीजी संयंत्रों से 15 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) के उत्‍पादन के लक्ष्‍य की संकल्‍पना की गई है।

कृषि अवशिष्‍ट, पशु विष्‍ठा, गन्‍ने की पीसी हुई छाल, नगरीय ठोस अपशिष्‍ट, सीवेज उपचार संयंत्र अपशिष्‍ट इत्‍यादि जैसे अपशिष्‍ट/ जैव-ईंधन के उपयोग से अवायवीय अपघटन की विधि से जैव-गैस की उत्‍पति की जाएगी। जैव-गैस में से हाइड्रोजन सल्‍फाइड (एच2एस), कार्बन डायोक्‍साइड (सीओ2), जल वाष्‍प को हटाए जाने एवं इसे कम्‍प्रैस्‍ड जैस गैस (सीबीजी) का स्‍वरूप प्रदान करने के लिए कम्‍प्रैस करके शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है जिसमें मैंथेन (सीएच4) के के तत्‍व 90% से भी अधिक होते हैं। सीबीजी में कैलोरिफिक वैल्‍यू है तथा इसके अन्‍य लक्षण सीएनजी के समान है जिससे इसका उपयोग नवीकरणीय ऑटोमोटिव ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इस प्रकार देश में उपलब्‍ध जैव-ईंघन की प्रचूर मात्रा को विचार में लेते हुए यह ऑटोमोटिव, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में सीएनजी का स्‍थान ले सकती है।

उपर्युक्‍त योजना के अंतर्गत तेल विपणन कम्‍पनियों (ओएमसी) ने 1.10.2018 से सीबीजी संयंत्रों की स्‍थापना करने, उत्‍पादन करने तथा तेल विपणन कम्‍पनियों को सीबीजी की आपूर्ति के लिए योग्‍य उद्यमियों से ईओआई (रूचि अभिव्‍यक्ति) प्राप्‍त करने के लिए एनआईईओआई (रूचि अभिव्‍यक्ति का नोटिस) जारी कर दिया है। अब प्राप्‍त रूचि अभिव्‍यक्तियों के मूल्‍यांकन में तेजी लाने के उद्देश्‍य से मासिक आधार पर एनआईईओआई जारी किए जा रहे हैं। रूचि अभिव्‍यक्ति की प्रस्‍तुति के लिए एनआईईओआई 30.6.2021 तथा आगे तक, यदि अपेक्षित हुआ, उपलब्‍ध रहेंगे। रूचि अभिव्‍यक्ति से संबंधित पूर्ण विवरण ज्ञात करने के लिए इच्‍छुक उद्यमी/पार्टियां एचपीसीएल की वेबसाइट (www.hindustanpetroleum.com) में निविदाएं एवं अनुबंध के अंतर्गत (सार्वजनिक निविदाएं पर क्लिक करके ईओआई अथवा सीबीजी सर्च कर सकते हैं) अथवा भारत सरकार के केन्‍द्रीय लोक प्रापण पोर्टल (https://eprocure.gov.in/cppp/)पर विजिट कर सकते हैं।

30.6.2020 की स्थिति के अनुसार एचपीसीएल ने मूल्‍यांकन प्रक्रिया के पश्‍चात 208 टीपीडी (80टीएमटीपीए) क्षमता वाले सीबीजी संयंत्रों की स्‍थापना के लिए 54 आशय पत्र (एलओएल) जारी किए हैं जबकि राष्‍ट्रीय हित में अन्‍य अनेक आशय पत्र निकट भविष्‍य में जारी किए जाएंगे।

इन संयंत्रों से उत्‍पन्‍न होने वाली सीबीजी का परिवहन जल माध्‍यमों (अथवा पाइपलाइनों के माध्‍यम से, यदि व्‍यवहार्य हुआ) से तेल विपणन कम्‍पनियों के रिटेल आउटलेटों (ईंधन स्‍टेशन) तक हरित परिवहन ईंधन विकल्‍प के रूप में विपणन के लिए किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा

सौर ऊर्जा : वर्ष 2019-20 के दौरान, विभिन्न स्थानों पर 10 MWp की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई, जिसके साथ कुल सौर ऊर्जा क्षमता 32.5 MWp हो गई।

पवन ऊर्जा: वर्ष 2019-20 में कुल 101 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता से लगभग 18.6 करोड़ KWh विद्युत उत्पादन किया गया।