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नयी पहल

एचपीसीएल अपने सभी ऑपरेटिंग स्थानों पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण की देखभाल के उच्च मानकों को बनाए रखता है| निगम यह सुनिश्चित करता है कि अपने बढते कारोबार का
स्वास्थ्य और पर्यावरण के मानकों पर बुरा असर ना हो | और वह भी शून्य व्यावसायिक चोटों, परिचालन घटनाओं और पर्यावरण विज्ञप्ति के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य की दृष्टि खोए के बिना।

एचपीसीएल अपना व्यापार करते समय पर्यावरण संरक्षण, स्थायी विकास, सुरक्षित जगह काम और कर्मचारियों के जीवन की गुणवत्ता को सुधारने, ग्राहकों और समुदाय को समृद्ध करने के लिये प्रतिबद्ध है| सुरक्षा के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिये, व्यावसायिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को सुधारने के लिए स्थापित प्रणालियों और प्रक्रियाओं में लगातार सुधार किये जाते है|

स्वास्थ्य: एचपीसीएल अच्छी तरह से सभी प्रमुख स्थानों पर स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाओं / व्यवस्था से सुसज्जित किया गया है। एचपीसीएल ने व्यावसायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है और व्यावसायिक स्वास्थ्य से संबंधित सभी मुद्दों पर एचपीसीएल ने नज़र रखी है|

सुरक्षा : एचपीसीएल ने अनेक वर्षों में इसकी सुरक्षा के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है| दोनों रिफाइनरियों की सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को लगातार M/s. DNV द्वारा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रेटिंग प्रणाली (ISRS) के तहत ऑडिट किया जाता है| मुंबई रिफाइनरी और विशाख रिफाइनरी ने पहले से ही स्तर 6 से 8 स्तर पर तरक्की की है|

पर्यावरण :

रिफाइनरियों में SO2 जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन वर्ष 1984 से लेकर आज तक 60 टीपीडी से कम होकर 25 टीपीडी हो गया है। विभिन्न प्रकार की प्रक्रिया और उत्पाद के अलावा 4.5 एमएमटीपीए से 13 एमएमटीपीए क्षमता में वृद्धि के बावजूद यह फर्क दिखाई दिया है|

एचपीसीएल ने पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों का बीड़ा उठाया था| जैसे कि तीन तेल निष्कर्षण इकाइयों में फिनाइल से बदलकर एनएमपी द्रावक का इस्तेमाल करना , और हेक्सेन त्रिटिंग प्लांट में ओलियम से एनएमपी में बदलाव की काफ़ी सरहाना की गयी है|

मानक ब्यूरो 2000 / यूरो II मानदण्डों के अनुसार डीजल में से सल्फर को 1.0% से 0.05% तक कम करने लिए डीजल डीसल्फराइजेशन की सुविधा दोनों रिफाइनरियों में है|

एचपीसीएल ने यूरो III डीज़ल और पेट्रोल के उत्पादन की प्रक्रिया में वर्गीकरण के लिए अपनी रिफाइनरियों में "हरे ईंधन" परियोजनाएं शुरू की हैं। यह 2750 करोड़ रूपए की परियोजना है|
राष्ट्रीय नीति के अनुसार इंधन की गुणवत्ता यूरो III और यूरो IV मानकों को पूरा करने के लिए यह योजना शुरू की गयी है| यह परियोजनाएं जल्द ही पूरी हो जाएगी|

दोनों रिफाइनरियों ने क्रूड टैंक की गंदगी को साफ़ करने के लिए M/s बामर अॅन्ड लॉरी अॅन्ड कंपनी लिमिटेड के सिटु बाल्को तकनीक का उपयोग किया है|

रिफाइनरियों से पेट्रोलियम उत्पादों के 75% से भी अधिक उत्पादों को पाइपलाइनों के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा है। उत्पादों की निकासी के लिए सड़क परिवहन पर निर्भरता कम हुई है| इसके कारण ऑटो में से कम धुंआ निकलता है|

कचरे का प्रबंधन:
कचरे के प्रबंधन के नियमों के अनुसार अलग अलग बचा हुआ कचरा, तेलयुक्त कीचड़ , और बिना तेल के कचरे को अलग किया जाता है| इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कचरा जमा करने और उसे निपटाने के लिए सुविधाएं प्रदान की है| भविष्य में प्रस्तावित तरल प्रवाह के मानदंडों का पालन करने के लिए, विद्यमान ETP-I और ETP-II के साथ नए ETP को शामिल किया गया है| इसमें कीचड़ पर पुर्नप्रक्रिया करने के साथ साथ मेम्ब्रेन बायो रिएक्टर भी है और TTP ने इसे मंजूरी दी है| और मुंबई रिफाइनरी में इसका कार्य तेज़ गति से चल रहा है|

परिवेश की वायु गुणवत्ता पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है और राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक के अनुसार इसको संभाला जा रहा है|

धुंए से निकलने वाले सभी तरह के प्रदूषक जैसे कि CO, NOx, HC, SO2, SPM को बाहर निकाला जाता है|

दोनों रिफाइनरियों के पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली की फिर से लेखा परीक्षा की गयी है और ISO-14001 के सुधारित मानकों के अनुसार इसे सन्मानित किया गया है|

विपणन स्थान :

सभी 44 एलपीजी प्लांट ISO 9001:2000,38 प्लांट ISO 14001 और 21 प्लांट OHSAS: 18001 से प्रमाणित हैं |

68 पिओएल स्थान (2008 से ) ISO 9001 से मान्यता प्राप्त , 32 स्थान ISO 14001 और 12 स्थान ISRS और 3 स्थान OHSAS 18001 से
प्रमाणित हैं |

रिफाइनरियों, विपणन स्थापनाओं और आवासीय कालोनियों के आसपास के क्षेत्र में पूर्णत: हरियाली है |

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