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वैकल्पिक ऊर्जा

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एक ऊर्जा कंपनी होने के नाते, एचपीसीएल अक्षय ऊर्जा संसाधनों के दोहन के लिए वैकल्पिक स्रोतों के साथ प्रयोग में अग्रणी रही है। दिनांक 31 मार्च २०११ तक इसके पास 50.5 मेगावॉट की क्षमता का पवन ऊर्जा संस्थापित हो चुकी है।

पवन ऊर्जा

A Windmill of 1.25 MW capacity at the HPCL Wind Mill farm at Jaisalmer, Rajasthan

महाराष्ट्र: एचपीसीएल के प्रथम अक्षय और वैकल्पिक ऊर्जा पवन ऊर्जा जनरेटर महाराष्ट्र राज्य के धुले शहर में मई 2007 में प्रवर्तन किया गया था। यह 3.75 मेगावाट, लगभग रुपये १९ करोड़ की लागत वाली, अग्रगामी आद्योपांत परियोजना में केवल १.२५ मेगावॉट की संस्थापित क्षमता वाली 3 विंड टर्बाइन जेनरेटर (WTG) इकाइयां शामिल हैं। यह कार्य मे सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड द्वारा निष्पादित की गई थी।

इस उद्यम से उत्पन्न ऊर्जा महाराष्ट्र राज्य बिजली बोर्ड (एमएसईबी) को बेची जा रही है।

राजस्थान: 1 जनवरी 2009 को राजस्थान राज्य के जैसलमेर में एक और पवन ऊर्जा परियोजना एचपीसीएल द्वारा प्रवर्तित की गई थी। इस 21.25 मेगावाट की आद्योपांत परियोजना, जिसे मे. सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड द्वारा रु.110 करोड़ रुपये में निष्पादित किया था, में 17 इकाइयों का एक खेत है और प्रत्येक WTG इकाई की संस्थापित क्षमता 1.25 मेगावाट की है।

दूसरी पवन ऊर्जा परियोजना जैसलमेर राजस्थान में 18 दिसम्बर 2010 को संस्थापित किया गया था। यह 25.5 मेगावाट क्षमता वाली आद्योपांत परियोजना, मे सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड द्वारा रु.१५४.५७ करोड़ रुपये की लागत से निष्पादित की गई है जिसमें एक १७ इकाई का पवन-खेत है और प्रत्येक WTG इकाई की संस्थापित क्षमता १.५ मेगावाट है।

इनके द्वारा उत्पन्न ऊर्जा राजस्थान राज्य विद्युत ग्रिड के माध्यम से आंशिक रूप में एचपीसीएल के अजमेर, जयपुर, कोटा, पाली और जोधपुर केंद्रों द्वारा उपभोग की जाती है। अधिशेष ऊर्जा राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड (RSEB) को बेची जाती है।

एचपीसीएल अक्षय ऊर्जा संसाधनों और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की खोज एवं उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहता है।

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