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एचपी गैस के बारे में

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आधुनिक रसोई गैस पहले यूनियन कार्बाइड द्वारा "पायरोफैक्स" ब्रांड के नाम में वर्ष 1920 में शुरू की गई थी। भारत में रसोई गैस का विपणन बरमाशेल स्टैनवैक द्वारा पचास के दशक में रिफाइनरियों के आसपास के शहरों में शुरू किया गया था। रसोई गैस का विपणन एस्सो एण्ड काल्टेक्स के निजी रियायतधारकों को जैसे तत्कालीन कोसन गैस, डीजीपीएल एण्ड जे.के. गैस को सौंपा गया था। इन रियायतधारकों को एचपीसीएल के साथ अधिग्रहण एवं विलय होने के पश्चात, एचपीसीएल ने एलपीजी का विपणन 1979 में “एचपी गैस” ब्रांड के नाम से शुरू किया, उस समय कुल ग्राहक 7.8 लाख थे। 1970 तक एलपीजी की मांग कम थी – कुल 174 टीएमटी।

आज द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सबसे लोकप्रिय घरेलू ईंधन बन गया है। 1955 में शुरू की गई रसोई गैस की खपत में अब काफी वृद्धि हुई है। अप्रैल 2011 तक एचपी गैस के 2630 से अधिक वितरकों के नेटवर्क के माध्यम से 330 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की पूर्ती की जाती है। एचपीसीएल का एलपीजी ब्रांड, एचपी गैस, ही है जिससे लाखों भारतीय घरों में आग जलती रहती है । देशभर में फैले हुए 44 एलपीजी बॉटलिंग संयंत्रों, जिनकी कुल क्षमता 3550 टीएमटीपीए (हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष) है, द्वारा भरी गई बोतलबंद एचपी गैस की पूर्णतः जांच के बाद ही विक्रेताओं के माध्यम से आप तक पहुँचाई जाती है। इसीलिए एचपी गैस सुरक्षा का पर्यायवाची माना जाता है।

एचपीसीएल के पुनर्गठन के समय व्यापार प्रक्रिया की पुनर्संरचना की गयी जिसमें एचपी गैस को एक अलग सामरिक व्यवसाय के रूप में लिया गया। इसके चलते, रसोई गैस (एलपीजी) क्षेत्रीय कार्यालयों का निर्माण, एलपीजी बॉटलिंग संयंत्रों को मद्देनज़र रखकर, किया गया तथा समर्पित एचपी गैस बिक्री क्षेत्रों को निर्धारित किया गया। क्षेत्रीय विपणन सेटअप के तहत 32 अनन्य एलपीजी प्रबंधक शामिल हैं। प्रत्येक बिक्री क्षेत्र में एक अनन्य बिक्री अधिकारी है जो एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र के एलपीजी विपणन के विभिन्न पहलुओं की देख-रेख करता है जिनमें एचपी गैस के वितरकों पर नियंत्रण शामिल है।

घरेलू एलपीजी के साथ-साथ एचपीगैस वाणिज्यिक एवं औद्योगिक प्रयोजन के लिए एलपीजी सिलिन्डरों की बिक्री करता है तथा उद्योगों के लिए थोक एलपीजी की पूर्ती टैंकरों द्वारा करता है।

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